Thursday, July 30, 2009

आज शांत होके ....


आज शांत हो के इतना बह रही हो क्यों

शायद लहरों ने उनके पाँव को छू लिया होगा ,

हवा क्यों किसी शाख को हिलाती अब नही

लगता है उन्होंने जुल्फों को झटक दिया होगा ,

शाम हो चुकी है पंछी चह -चहाते क्यों नही

लगता है उनके ओठों से कोई नॉहा सुन लिया होगा ,

क्यों बादल अब इतना घनघोर बरसते हो

शायद बूंदों ने उनके बदन को छू लिया होगा,

मौत आ आ के लौट जाती क्यूं दामन से मेरे

शायद उन्होंने कभी दुआओं में 'मुझको' मांग लिया होगा,

मुस्कराना सीख लो


मुस्कराना सीख लो दर्द में काम आएगा

आँसू बहाना सीख लो खुशियों में काम आएगा ,

है औरो की तुमको फ़िक्र क्यों...

तुम अपने लिए जीना सीख लो काम आएगा ,

रास्तो में मिलेंगे पत्थर तो बहोत

तुम ठोकर लगाना सीख लो काम आएगा,

झुकते और झुकते कही टूट मत जाना

तुम सर को उठाना सीख लो काम आएगा,