जब कभी किसी से अपनी पहचान रखना
एक लफ्ज में ही सदियों की दास्तान रखना
पूंछे जो तुम्हारी हसरते कोई
जेबों को खली बता कर , दिल में आसमान रखना
आए जो करीब तो लगा लेना गले
उसकी हैसियत से होके कम भी ,ख़ुद को सतो जहान रखना
अपनी तारीफ़ को बया करे तुमसे वो अगर
मगर तुम चुप रहके भी उसको हैरान रखना
करने लगे नफरत तुमसे अगर वो
तो तू भी अपने अन्दर के बेमेहर को ,चढ़ते आफताबके सामान रखना
Friday, September 11, 2009
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