Friday, September 11, 2009

जब अपनी पहचान रखना

जब कभी किसी से अपनी पहचान रखना
एक लफ्ज में ही सदियों की दास्तान रखना

पूंछे जो तुम्हारी हसरते कोई
जेबों को खली बता कर , दिल में आसमान रखना

आए जो करीब तो लगा लेना गले
उसकी हैसियत से होके कम भी ,ख़ुद को सतो जहान रखना

अपनी तारीफ़ को बया करे तुमसे वो अगर
मगर तुम चुप रहके भी उसको हैरान रखना

करने लगे नफरत तुमसे अगर वो
तो तू भी अपने अन्दर के बेमेहर को ,चढ़ते आफताबके सामान रखना

Tuesday, August 4, 2009

न बदला है न बदलेगा ...

सूरज वही चाँद वही सदियों से दबे लोगो के नाम यही
न बदला है न बदलेगा गीता वही है कुरान वही,
वक्त कितने निशानों को छोड़ गया
गंगा की हर एक लहर का इतिहास वही,
हर युग सजदे में झुका है, एक खुदा के सओ नाम वही
कुछ भी बदला नही प्यारे ये जमीं वही आसमान
बेशक दिखाईये रुतबा अपना, हक़ दिखाइए पर गुमान नही

मौजे हवा क्या काम कर गई ...


कल मौजे हवा क्या काम कर गई

मेरी मय्यत से इक गुल पंखुरी उड़ाके ले गई

ले जा के उसको डाला दामने- यार के

छूने से उनके उसकी खुश्बू बढ़ गई

क्या खूब था नजारा इक तरफ़ लोग रो रहे थे

उधर हथेली पे रख के पंखुरी सनम झूमते थे

मुफ्लिश था मैं जो जी के उसे दे सका न कुछ

मर कर मौजे हवा ने पंहुचा दी मेरी निशानी

इश्क को कभी ........


इश्क को कभी हमने भी आजमाया था

उस जानिशा से कभी हमने भी दिल लगाया था

आँखों में उसकी सूरत सब होश थे उड़े

रातो में जागते हुवे कभी अपने को पाया था

वो साथ दे सका न ये और बात है

पर वो दुनिया से मुँह छुपायेगा, उसके जी में क्या आया था

ऐ बशर तुम कहना न बेवफा उसे

उसने तो जाते हुवे भी मेरे तरफ़ हाथ बढाया था

मैं डूबा हु उसके दर्द में शबे -शाम से

कल उस मरहूम की यादों ने मुझे फिर से रुलाया था

Thursday, July 30, 2009

आज शांत होके ....


आज शांत हो के इतना बह रही हो क्यों

शायद लहरों ने उनके पाँव को छू लिया होगा ,

हवा क्यों किसी शाख को हिलाती अब नही

लगता है उन्होंने जुल्फों को झटक दिया होगा ,

शाम हो चुकी है पंछी चह -चहाते क्यों नही

लगता है उनके ओठों से कोई नॉहा सुन लिया होगा ,

क्यों बादल अब इतना घनघोर बरसते हो

शायद बूंदों ने उनके बदन को छू लिया होगा,

मौत आ आ के लौट जाती क्यूं दामन से मेरे

शायद उन्होंने कभी दुआओं में 'मुझको' मांग लिया होगा,

मुस्कराना सीख लो


मुस्कराना सीख लो दर्द में काम आएगा

आँसू बहाना सीख लो खुशियों में काम आएगा ,

है औरो की तुमको फ़िक्र क्यों...

तुम अपने लिए जीना सीख लो काम आएगा ,

रास्तो में मिलेंगे पत्थर तो बहोत

तुम ठोकर लगाना सीख लो काम आएगा,

झुकते और झुकते कही टूट मत जाना

तुम सर को उठाना सीख लो काम आएगा,