Tuesday, August 4, 2009

इश्क को कभी ........


इश्क को कभी हमने भी आजमाया था

उस जानिशा से कभी हमने भी दिल लगाया था

आँखों में उसकी सूरत सब होश थे उड़े

रातो में जागते हुवे कभी अपने को पाया था

वो साथ दे सका न ये और बात है

पर वो दुनिया से मुँह छुपायेगा, उसके जी में क्या आया था

ऐ बशर तुम कहना न बेवफा उसे

उसने तो जाते हुवे भी मेरे तरफ़ हाथ बढाया था

मैं डूबा हु उसके दर्द में शबे -शाम से

कल उस मरहूम की यादों ने मुझे फिर से रुलाया था

No comments:

Post a Comment