सूरज वही चाँद वही सदियों से दबे लोगो के नाम यही
न बदला है न बदलेगा गीता वही है कुरान वही,
वक्त कितने निशानों को छोड़ गया
गंगा की हर एक लहर का इतिहास वही,
हर युग सजदे में झुका है, एक खुदा के सओ नाम वही
कुछ भी बदला नही प्यारे ये जमीं वही आसमान
बेशक दिखाईये रुतबा अपना, हक़ दिखाइए पर गुमान नही
Tuesday, August 4, 2009
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